‘मेरे घर में चहकती थी बेटियां, पूरे शहर को खटकती थी बेटियां’

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‘बेटियां’ कितना खूबसूरत शब्द है, लेकिन ना जाने कहां विलुप्त हो गया हमारा ये अहसास। हम अपनी बेटियों के प्रति क्रूर से क्रूरतम होते चले जा रहे हैं।

New Delhi, Oct 12 : इंडिया आई आईएचआरओ ऐसी स्वयंसेवी संस्था है, जो बेटी बचाओ के साथ-साथ बुजुर्गो की देख-भाल, पर्यावरण-संरक्षण और दृष्टिहीनों के कल्याण तथा आदिवासियों के संरक्षण के लिए काम करती है। इस संस्था ने इस साल भी अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस कार्यक्रम बड़े जोश के साथ मनाया, इस कार्यक्रम में इंडिया आई आईएचआरओ द्वारा देश की प्रतिभाशाली और होनहार बेटियों और विशिष्ट उपलब्धि से अपने क्षेत्र में नाम कमाने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया।

इंडिया आई आईएचआरओ के इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर साध्वी ऋतंभरा पहुंची, साथ ही मुख्य अतिथि के रुप में गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा थीं। इस मौके पर इंडिया आई आईएचआरओ के मैनेजिंग डायरेक्टर राकेश शर्मा ने अपने भाषण में कहा कि ‘बेटियां’ कितना खूबसूरत शब्द है, लेकिन ना जाने कहां विलुप्त हो गया हमारा ये अहसास। हम अपनी बेटियों के प्रति क्रूर से क्रूरतम होते चले जा रहे हैं, उन्होने अपने भाषण में एक रिसर्च का जिक्र करते हुए कहा कि बीते करीब 20 सालों में भारत में कन्याभ्रूण हत्या की वजह से करीब 1 करोड़ बच्चियां जन्म लेने से पहले ही काल की बलि चढा दी गई। लड़कियों के प्रति अवहेलना की मानसिकता सिर्फ अनपढ या कम पढे लिखे लोगों में ही नहीं बल्कि पढे-लिखे वर्ग में भी व्याप्त है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर आई मृदुला सिन्हा ने कहा कि बेटियों की कोई जाति नहीं होती, बेटी साधारण नहीं बल्कि विशेष होती हैं। आज समाज में समानता के नाम पर लड़कियों को लड़का बनाया जा रहा है, लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिये, कि नारी एक जननी है, यही गुण उन्हें महान बनाता है। अपने भाषण के दौरान उन्होने कई बार पीएम के बेटी बचाओ, बेटी पढाओ अभियान का भी जिक्र किया। साध्वी ऋतंभरा ने इस मौके पर कहा कि सभ्यता का मुखौटा लगाये लोग बेटियों पर कहर बरपाते हैं, लाभ-हानि के तराजू पर हमने अपनी बेटियों को चढा दिया है, ये दानवों का काम हो सकता है, मानवों का नहीं। इस मौके पर उन्होने चार लाइनें भी पढीं।

मेरे घर में चहकती थी बेटियां
शहरभर को खटकती थी बेटियां
राह तकते-तकते कहां खो गई बेटियां
अब के तनख्वाह पर ये वस्तु लाना कहते-कहते झिझकती थी बेटियांKirti Kulhari
आगे बोलते हुए उन्होने कहा कि जिम्मेदारियां हमें निभानी होगी, इसलिये हमें देखना होगा, कि हम कहां खड़े हैं। संपूर्ण नारी जगत को अपने होने पर गर्व होना चाहिये। तभी बालिकाओं का संवर्धन होगा।

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Ankush Kakkar

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Ankush Kakkar | Ankush Kakkar is having 10 year Experience in Vedic astrology and Vastu Consultancy.Ankush Kakkar have an expertise in four different streams of astrology. These are Vedic, Lal Kitab, KP and Vastu Consultancy. All of these streams have their strengths and weaknesses. I have an extensive knowledge as to where to use which stream for a flawless prediction. Some are used in Horary Astrology and some are good in predicting Varshphal. You need not worry if you do not…