झारखंड में बीजेपी ने शुरु कर दी चुनावी तैयारी, यहां भी यूपी फॉर्मूला लगाने की तैयारी !

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झारखंड : वैसे तो जमीन पर किसी को तैयारी नजर नहीं आ रही, लेकिन अंदर ही अंदर एक बड़ी टीम इस काम में लगी हुई है, ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर ये सब कौन कर रहा है।

New Delhi, Sep 11 : झारखंड में अंदर ही अंदर विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरु हो चुकी है, वो भी पूरी गंभीरता के साथ। सत्ताधारी बीजेपी बाकि अन्य दलों से 4 कदम आगे निकलते हुए तैयारी शुरु कर दी है। आपको बता दें कि साल 2019 में लोकसभा के बाद झारखंड में विधानसभा चुनाव भी होने हैं, पूरी संभावना जताई जा रही है, कि बीजेपी यूपी विधानसभा चुनाव फॉर्मूला यहां भी अपनाये, यानी प्रदेश में 26 फीसदी आदिवासियों के बजाय 74 फीसदी गैर-आदिवासियों मतदाताओं को टारगेट किया जाए और उनसे वोट लिया जाए।

वैसे तो जमीन पर किसी को तैयारी नजर नहीं आ रही, लेकिन अंदर ही अंदर एक बड़ी टीम इस काम में लगी हुई है, ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर ये सब कौन कर रहा है। इस समय बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का 3 दिनों के दौरे पर पहुंचना क्या इशारा कर रहा है, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी का पहुंचना यूं ही नहीं है। सब कुछ पर्दे के पीछे शुरु हो चुका है। चुनावी रणनीति में माहिर माने जाने वाले रजत सेठी ने कमान संभाल ली है। आपको बता दें कि ये वहीं रजत सेठी हैं, जिन्होने असम में कमल खिलाया था। झारखंड में तैयारी से जुड़े एक सूत्र का कहना है कि प्रदेश में महीने भर पहले एक सर्वे कराया गया था, जिसमें करीब 25 हजार लोगों से वीडियो सैंपल लिये गये।

इस सर्वे के अनुसार मास वोटर झारखंड सरकार से नाराज नहीं है, अगर बीजेपी इसे आधार बनाती है, तो वो फिलहाल लीड नहीं ले रही है। बाकी रही-सही कसर अगले डेढ साल में सरकार पूरा करने पर जोर लगा रही है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 15 सितंबर को झारखंड पहुंच रहे हैं, सीएम रघुबर दास जिला दर जिला घूमना शुरु कर चुके हैं। इस सर्वे में कमजोर और मजबूत सीटों का भी पता चल गया है, यानी अगर पार्टी नेतृत्व को किसी भी तरह का संकट दिखा, तो सिटिंग विधायकों के भी टिकट काटे जा सकते हैं, हालांकि अभी के हालात को देखकर लगता है कि ऐसे हालात नहीं आएंगे। फिलहाल बीजेपी के पास 38 सीटें है। सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर विधानसभा चुनाव किन मुद्दों पर लड़े जाएंगे, बीजेपी की रणनीति क्या होगा, जनता किन मुद्दों पर वोट करेगी। सर्वे में इन सवालों को भी टटोलने की कोशिश की गई।

संघ और बीजेपी हाईकमान इस बात पर भी विचार कर रहा है कि सीएम रघुबर दास के अलावा दूसरा चेहरा भी तैयार रखना होगा, क्योंकि झारखंड में गैर आदिवासी चेहरे के बदौलत ज्यादा दिनों तक सरकार नहीं चलाया जा सकता। इसके लिये सबसे पहली पसंद बाबूलाल मरांडी हो सकते हैं, लेकिन वो बीजेपी में नहीं हैं, जब से उन्होने पार्टी छोड़ी है, तब से हर महत्वपूर्ण मौकों पर उन्हें मनाने की कोशिश की गई, लेकिन सब कुछ तय होने के बाद भी वो बीजेपी में शामिल नहीं हुए। पिछले विधानसभा में भी उनके 8 विधायक थे, उनकी पार्टी के 6 विधायकों ने बीजेपी ज्वाइन कर लिया, लेकिन वो रह गये। नेतृत्व क्षमता, संघ की समझ और आदिवासी राज्य की जरुरत के अलावा वो मास लीडर भी माने जाते हैं, लेकिन संगठन से बाहर होने की वजह से वो कमजोर दिखते हैं।
मरांडी के अलावा खूंटी से विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा पर भी बीजेपी हाईकमान की नजर है, उनकी भी पहुंच जनमानस के बीच है। आदिवासी चेहरा होने के साथ-साथ वो बेदाग छवि के नेता भी माने जाते हैं, जो कि उनका मजबूत पक्ष है। हालांकि प्रशासनिक तौर पर वो पखर नहीं है, ये उनके लिये भारी पड़ सकता है। तीसरा अगर पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा अगली बार विधानसभा चुनाव जीत जाते हैं, तो वो एक मजबूत दावेदार के तौर पर उभर सकते हैं, लेकिन आडवाणी कैंप के होने की वजह से शायद मोदी-शाह उन्हें कुर्सी पर ना बैठने दें, कुल मिलाकर एक बार बात फिर से रघुबर दास पर ही आकर रुक जाती है।

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