चीन को भारत का जवाब है ‘माउंटेन रेजीमेंट’,मोदी के महाबली का हाहाकारी ऐलान !

PIC- BIPIN RAWAT

भारत की सीमाओं पर दुश्मनों की घुसपैठ लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही अब सीमा पर माउंटेन रेजीमेंट को तैनात किया जाएगा। भारतीय सेना तैयार है।

New Delhi, Sep 13 : डोकलाम में भले ही चीन ने हार मान ली हो, लेकिन उसकी नजर भारत की कई सीमाओं पर है। हाल ही में इस बात का खुलासा भी हो चुका है। आपको याद होगा कि इससे पहले चीन के ही अखबर ग्लोबल टाइम्स में कहा गया था कि अगर डोकलाम में भारतीय सेना डटी है तो चीन के पास घुसपैठ के और भी रास्ते हैं। आपको ये भी याद होगा कि चीन लगातार उत्तराखंड से घुसपैठ की प्लानिंग कर रहा है। ऐसे में भारतीय सेना तैयार है। इसके लिए माउंटेन रेजीमेंट तैयार है। उत्तराखंड की सीमाओं पर सैन्य क्षमता बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा यहां खास तकनीकि से लेस अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स यानी यूएवी तैनात किए जाएंगे।

सेना के सूत्रों के हवाले से खबर है कि यहां हैवी फायरिंग रेंज बनाने की भी तैयारी की जा रही है। अब आपको बताते हैं कि आखिर इस सबके पीछे किसका दिमाग है। आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने ये बात कही है। आर्मी चीफ का कहना है कि ऐसी हरकतों का जवाब अब माउंटेन रेजीमेंट ही देगी। दरअसल आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत देहरादून पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सरहद, देश की किसी भी सीमा से कम संवेदनशील नहीं है। इसके साथ ही जनरल रावत ने कहा कि भारतीय सेना के पास ऐसी ताकत मौजूद है कि देश की सरहद सुरक्षित हो। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सरहद में कोई घुसपैठ नहीं होगी।

जनरल रावत ने कहा कि इसके लिए तमाम तैयारियां हो रही हैं। इसके साथ ही उनका कहना है कि जल्द ही यहां इस रेजीमेंट को तैनात किया जाएगा, जिससे उत्तराखंड के सरहदी इलाके सुरक्षित रह सकें। अब आपको बताते हैं कि ये रेजीमेंट कितनी ताकतवर है। इस रेजीमेंट के जवान पहाड़ी इलाकों में कारगर तरीके से दुश्मन पर वार कर सकते हैं। इस रेजीमेंट के जवाब अत्याधुनिक हथियारों से लैस रहते हैं। हर वक्त ये जवान कड़ी मेहनत में जुटे रहते हैं। ऐसे जवानों को इस रेजीमेंट के लिए लिया जाता है जो बर्फीले इलाकों में रहने के आदी होते हैं और दुश्मन की हर एक हरकत पर पैनी नजर रखते हैं।

ये रेजीमेंट डरती नहीं है और दुश्मन पर सीधे वार करती है। इन जवानों को खास तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। ये चीते से फुर्तीले होते हैं और बेहद कम वक्त में ही किसी ऑपेरशन को अंजाम दे सकते हैं। उत्तराखंड की चीन और नेपाल से करीब 600 किलोमीटर लंबी सीमा सटी है। देखा जाए तो सामरिक दृष्टि से ये सीमा बेहद संवेदनशील है। बीते 17 सालों में कई बार चीन ने उत्तराखंड की सीमा में घुसपैठ की है। इसके अलावा नेपाल से तस्कर इस सीमा का इस्तेमाल करते हैं। इस बीच खबर है कि चीन ने अपनी सेना को अत्याधुनिक हथियारों और टेक्नोलॉजी से लैस कर दिया है। ऐसे में चीन को जवाब देने के लिए इस रेजीमेंट को सरहदी इलाकों में तैनात किया जाएगा।

आगे पढ़ें : BRICS के मंच पर पीएम मोदी की चाल में फंस गया चीन

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Alankrita Manvi

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