अमित शाह ने बीजेपी को ऐसे बनाया नंबर-वन… एक तीर से कई निशाना साधते हैं ‘चाणक्य’ !

Amit Shah, अमित शाह, बीजेपी

दूसरी पार्टियों के नेताओं में बीजेपी में शामिल होने की होड़ लगी हुई है, उन्हें अब अपना भविष्य बीजेपी में ही सुरक्षित दिखता है।

New Delhi, Apr 21 : दिल्ली कांग्रेस के बड़े नेता और राज्य में कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे अरविंदर सिंह लवली जब कांग्रेस का साथ छोड़ कर बीजेपी में शामिल हुए तो लोगों को बहुत हैरानी नहीं हुई। इसकी वजह ये थी कि हाल के दिनों में कांग्रेस से दलबदल कर बीजेपी में शामिल होने की ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, और लोगों ने अब हैरान होना छोड़ दिया है। यूपी, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और अब दिल्ली, बीजेपी के सत्ता के रथ मे दूसरी पार्टी के नेताओं की सवारी लगातार नजर आ रही है। कहीं चुनाव से पहले तो कहीं चुनाव के मौके पर, कहीं चुनाव के बाद। दूसरी पार्टियों से बीजेपी में शामिल होने वाले नेताओं की होड़ सी लग गई है, चाहे वह नेता अपनी पार्टी में कितना ही बड़ा क्यों ना हो।

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BJP अध्यक्ष अमित शाह भी ऐसे नेताओं का दिल खोल कर स्वागत कर रहे हैं। दूसरी पार्टी के कद्दावर नेताओं को BJP में शामिल करवाने के पीछे अमित शाह की रणनीति यह भी है कि, जो भी नेता दूसरी पार्टी से आएगा वो कुछ न कुछ वोट अपने साथ लाएगा, क्योंकि उनका व्यक्तिगत वोट बैंक भी होता है। इससे BJP के वोट बढ़ेंगे ही और एक मैसेज यह भी जाएगा कि, हारने वाली पार्टी को ही अक्सर नेता छोड़ते हैं, वह जीतने वाले की तरफ जाते हैं तो नेताओं के आने से जनता को यह लगेगा कि BJP जीतने वाली पार्टी है और भविष्य भी इसी का है। यूपी-उत्तराखंड के चुनावों ने साबित किया कि अमित शाह की ये रणनीति कारगर रही है।

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विपक्ष को कमजोर करने के इस कामयाब फॉर्मूले के बावजूद बीजेपी पर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं क्योंकि ये नेता ऐसे हैं जिन्होंने दशकों तक BJP के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। इसके अलावा कई नेता ऐसे भी हैं जिन पर खुद BJP कई तरह के आरोप जिनमें भ्रष्टाचार के आरोप भी शामिल हैं, लगाती रही है और खुद भ्रष्टाचार मुक्त की बातें करती है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इससे कहीं ना कहीं BJP में भी आतुरता दिखती है, वो दूसरी पार्टी के नेताओं के सहारे वह चुनाव जीतना चाहती है। लवली से पहले एसएम कृष्णा, रीता बहुगुणा जोशी जैसे बड़े कई नाम हैं जो बीजेपी में शामिल हुए हैं। यूपी की रीता जोशी ने तो करीब 3 दशक तक बीजेपी के खिलाफ लड़ाई लड़ी, बीजेपी भी उन्हें खूब कोसती रही, यही रीता अब यूपी की बीजेपी सरकार में मंत्री हैं।

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यूपी में ही बीएसपी से BJP में आए स्वामी प्रसाद मौर्य और उत्तराखंड में विजय बहुगुणा भी इसी तरह के उदाहरण हैं। उत्तराखंड में विजय बहुगुणा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए BJP ने मुख्यमंत्री से उनके इस्तीफे की मांग की थी और जोरदार विरोध भी किया था, लेकिन उसी विजय बहुगुणा को उत्तराखंड चुनाव के पहले पार्टी में शामिल करवाया और उनके बेटे को टिकट भी दिया। इसी तरह से कर्नाटक में एसएम कृष्णा का मामला भी ऐसा ही है। उनके कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहते बीजेपी ने उन पर भ्रष्टाचार के आरोपों की झड़ी लगा दी थी, यहां तक कि जब उन्होंने विदेश मंत्री रहते दूसरे देश के मंत्री का भाषण पढ़ दिया था, उनकी भूल का प्रधानमंत्री मोदी ने खूब मजाक उड़ाया था। अब वही एसएम कृष्णा बीजेपी परिवार का हिस्सा है, उनके सारे‘पाप’ धुल गए। BJP की इस रणनीति को कर्नाटक के आने वाले चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

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दिल्ली में ऐन एमसीडी चुनावों के बीच शीला सरकार में मंत्री रहे और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे अरविंदर सिंह लवली को अमित शाह ने BJP में शामिल कर लिया। यह वही लवली हैं जिनके शिक्षा मंत्री रहते बीजेपी भ्रष्टाचार के आरोप लगाती थी और आए दिन लवली प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर BJP पर निशाना साधते रहे। लवली से आगे अब BJP की नजर कांग्रेस के दूसरे प्रदेश नेताओं पर भी है। इसी तरह से आम आदमी पार्टी के एक विधायक बीजेपी में शामिल हो चुके हैं और दावा है कि कुछ और भी इस कतार में हैं। बहरहाल सवाल जो भी उठे जीत ऐसी चीज है जो सारी कमियों पर पर्दा डाल देती है। फिलहाल बीजेपी पर यही बात लागू होती है।

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Ankush Kakkar

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