भीड़ से घबराइए नहीं भीड़ ही भारत है- शंभुनाथ शुक्ला

PIC 1- शंभुनाथ शुक्ला

इसमें कोई शक नहीं कि नेहरू और इंदिरा के जमाने में गरीबों के लिए बहुत काम किया गया। पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार शंभुनाथ शुक्ला का ये ब्लॉग

New Delhi, May 19 : शंभुनाथ शुक्ला ने लिखा है कि उस समय की सरकारों के लिए समाज कल्याण और लोक का हित सबसे ऊपर था। यही कारण है कि आज भी चिकित्सा के क्षेत्र में सबसे सफल और सर्वाधिक विश्वसनीय जगह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ही है। वहां देश भर से मरीज आते हैं गरीब भी और मध्यवित्त वाले भी, किसी तरह लदफद कर। लेकिन जब यहां से जाते हैं तो हँसते हुए और डॉक्टरों को आशीषते हुए। मुझे भी एम्स के डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद नेत्र चिकित्सा केंद्र जाना पड़ गया। वजह यह थी कि दो साल पहले कानपुर स्थित सेंटर फॉर डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी डिसीज में मैने अपना चेकअप कराया तो वहां पर नेत्र विज्ञानी डॉक्टर संगीता शुक्ला ने बताया कि आप की विजन तो सही है पूरे छह बाई छह मगर मोतियाबिंद बन रहा है।

इसके बाद 2016 में वैशाली स्थित मैक्स अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉक्टर नीरज ने कहा कि अभी भी आपका मोतियाबिंद पका नहीं है। उन्होंने विजन छह बाई नौ बताई। जब इसे भी एक साल हो गए तो PIC 2- शंभुनाथ शुक्ला मैने एम्स में डॉक्टर जेएस टिटियाल को दिखाया। उन्होंने भी विजन तो सही बताई पर रेटिना क्लीनिक जाने की सलाह दी क्योंकि रेटिना में लालिमा आने लगी थी। आज जब एम्स के रेटिना क्लीनिक गया तो पूरी जांच के बाद डॉक्टर ने बस इतना ही कहा कि आप अपना ब्लड शुगर और बीपी नियंत्रित रखिए फिलहाल किसी भी तरह की दवा या इलाज की जरूरत नहीं है।

शंभुनाथ शुक्ला आगे लिखते हैं कि इतना सुनते ही मुझे लगा कि बस मानों मैने एक बड़ी जंग जीत ली। फिर मैने पूरे अस्पताल का अवलोकन किया। मुझे आश्चर्य हुआ कि साल 1996 में जब मुझे फाल्सी फेरम हुआ था तब फालतू में मैने पचास हजार खर्च कर इलाज कराया और उसके बाद भी रोग पकड़ में नहीं आया और जब पकड़ में आया तो सरकारी संस्थान में फ्री के इलाज से। इससे पता चलता है कि जवाहरलाल जी और इंदिरा जी कितने बड़े-बड़े काम कर गए हैं हम गरीबों के हितार्थ। जिस बीमारी को प्राइवेट डॉक्टरों की गलाकाट प्रतियोगिता और लूट से घबरा कर आदमी मर जाना पसंद करता है वैसी बीमारियां तो सरकारी चिकित्सा संस्थानों में फ्री में ही ठीक कर दी जाती हैं। यह सही है कि सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में भीड़ होती है पर वहां डॉक्टरों की लूट नहीं होती और वहां के डॉक्टरों को गरीब की सेवा का भाव समझाया जाता है।

भीड़ में ही रहिए और भीड़ में रहकर अपना साध्य तलाशिए तो पाएंगे कि जीवन तो यही है। कौन कहता है कि डॉक्टरों के दिल नहीं होता अथवा डॉक्टर तो बस लूटते ही हैं। बस सही आदमी की तलाश करिए। और इलाज सदैव सरकारी अस्पतालों में कराइए और बच्चों की पढ़ाई भी सरकारी स्कूलों में करवाइए आप पाएंगे कि लूट के तंत्र से आप बच गए हैं। खुदा का शुक्र है कि मैने अपने बच्चों को केंद्रीय विद्यालय में ही पढ़ाया और बीमारी के लिए एम्स या वैसे ही सरकारी संस्थानों की शरण लेने में ही मुझे भरोसा हैै। सरकारी विभाग वह चाहे पुलिस हो अथवा प्रशासन उसमें कहीं न कहीं नेहरूवादी लोककल्याण की भावना भरी हुई है। अब यह बात अलग है कि रेलवे जैसे संस्थान से अर्थविज्ञानी सुरेश प्रभु लोककल्याण को वापस ले रहे हैं। वे दरअसल राजनेता नहीं बल्कि उस दलाल संस्कृति की पैदाइश हैं जहां सब चीजें बेच दी जाती हैं। वह तो शुक्र हो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का कि उनके अंदर लोककल्याण और गरीब हितार्थ काम करने की इंदिरा गांधी वाली आत्मा मौजूद है।

(वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार शंभुनाथ शुक्ला के फेसबुल वॉल से साभार। ये लेखक के निजी विचार हैं।)

आगे पढ़ें :पीएम मोदी ने फिर दी बड़ी खुशखबरी…खिल उठे करोड़ों मुरझाए हुए चेहरे !

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Vineeta Srivastava  | Astrologer, Tarot Card Reader and Vaastu Consultant Mrs. Vineeta Srivastava  is a qualified (M.A. in Astro science) Astrologer, Tarot Card Reader and Vaastu Consultant who gives accurate future readings through a medium of  Vaidik ,KP Astrology and Tarot Cards .  In her views Astrology is not based on Superstition, it actually based on Planetary positions and time. She is a Professional Certified Consultant who also uses her intuition to offer guidance to all of her clients, encouraging them to move in a positive direction and face…