लड़ें, अब नोटबंदी के इस भस्मासुर से!- Ved Pratap Vaidik

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नवंबर-दिसंबर 2016 में नोटबंदी के कारण कितने लोग बेरोजगार हो गए हैं, कितना व्यापार बैठ गया है और सरकारी खर्च कितना ज्यादा बढ़ गया है।

New Delhi, Jan 11 : एक तरफ नरेंद्र मोदी नोटबंदी का विरोध करने वालों को काला धन-पुजारी घोषित कर रहे हैं, दूसरी तरफ नोटबंदी की काली करतूतें रोज उजागर होती जा रही हैं। सरकार को आशा थी कि कम से कम तीन लाख करोड़ रु. का लाभ उसको होगा, क्योंकि लोग कम से कम इतने काले धने के नोटों को तो जला ही देंगे लेकिन ताजा अनुमान यह है कि अब सिर्फ 75 हजार करोड़ के पुराने नोट ही लोगों के पास हैं। ये भी 31 मार्च तक जमा हो सकते हैं, क्योंकि इतना पैसा तो हमारे डेढ़ करोड़ प्रवासी भारतीयों के पास ही हो सकता है। इसके अलावा नेपाल, मोरिशस, अफगानिस्तान तथा अन्य पड़ौसी देशों में भी भारतीय मुद्रा चलती है। वह भी वापस आएगी।

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अर्थात सरकार नोटबंदी से जो फायदा सेंत-मेंत में उठाना चाहती थी, उसका वह सपना चूर-चूर हो गया है। अब वह अपनी सारी ताकत बैंकों के चोर-खातों को पकड़ने में लगाएगी। देखें, उसमें से कितना पैसा उसके हाथ लगता है। लेकिन ज्यादा चिंता की बात ताजा आंकड़े हैं, जो कह रहे हैं कि नवंबर-दिसंबर 2016 में नोटबंदी के कारण कितने लोग बेरोजगार हो गए हैं, कितना व्यापार बैठ गया है और सरकारी खर्च कितना ज्यादा बढ़ गया है।
देश का सकल उत्पाद (जीडीपी) तो 0.5 प्रतिशत घट ही गया है, उसके अलावा देश के लघु-उद्योगों में 35 प्रतिशत मजूदरों का रोजगार खत्म हो गया है और इन उद्योगों की आमदनी 50 प्रतिशत घट गई है। इसका एक बुरा परिणाम यह भी हुआ है कि मजदूर लोग भाग-भागकर अपने गांवों में शरण ले रहे हैं। वे वहां जाकर महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना के तहत लंबी-लंबी लाइनें लगा रहे हैं।

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नवंबर 2016 में इन ग्रामीण मजदूरों की संख्या प्रतिदिन 30 लाख होती थी। अब जनवरी 2017 में वह बढ़कर 83 लाख हो गई है। हर मजदूर को सरकार एक दिन के 272 रु. देती है। 500 Note, नोट, नोटबंदीअब जरा अंदाज लगाइए कि सरकार को अरबों रु. महिने की चपत लग रही है या नहीं? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? नोटबंदी !

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नोटबंदी के हवाई फायदे गिना कर आम लोगों को भरमाने की बजाय बेहतर होगा कि मोदी विनम्रतापूर्वक अपनी गलती स्वीकार करें और लोगों से माफी मांगें। सरकार की पूरी ताकत इस समय नोटबंदी के भस्मासुर से लड़ने में लगनी चाहिए। noteजनता सरकार का साथ देगी, क्योंकि उसे विश्वास है कि सरकार ने यह नोटबंदी अच्छे इरादे से की थी लेकिन कई कारणों से यह विफल हो गई। लोगों ने नोटों को नहीं, नोटबंदी को रद्द कर दिया।

(वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक के ब्लॉग से साभार, ये लेखक के निजी विचार हैं)

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Pandit Parsai | Astrology Expert Pandit Parsai is an expert on subjects of human life including relationships, love-life, marriage, progeny, choice of education and career, luck in politics, troubles and rise in profession, problems of health, finance, real-estate, success in business, industry, profession or self-employment, litigation loss/gain of money and much more. He has gained over the years wide reputation in India, USA, Canada, United Kingdom, Europe and Australia, for his correct calculations for birth chart and other astrological charts and…
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